मै …. अशोक तपासे.
तथागत बुद्ध का अनुयायी. बुद्ध तत्वज्ञान (तिपिटक) का, पलि भाषा का अभ्यासक, सम्राट अशोक और उनके शिलालेखों को संशोधक अभ्यासक।


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बुद्ध का तत्वज्ञान समझाने वाला एक सुत्त संग्रह … “धम्मपद”, मैने धम्मपद का मराठी भाषा में अनुवाद, “मुक्तिपथ” नाम के पुस्तक के रूप में किया है।
मैं सम्राट अशोक के धम्म प्रचार से प्रेरित, उनके शिलालेख तथा स्तंभलेख का संशोधक अध्यायी हुँ। मैने सम्राट अशोक के भारत और नेपाल में मिले सभी शिलालेख और स्तंभलेख प्रत्यक्ष देखें है, तथा उनका अध्ययन किया है। सभी शिलालेख और स्तंभलेख पर एक पुस्तक का निर्माण किया है। इसका नाम है … “पियदसि राञा हेवं आहा …”। पहले यह पुस्तक मराठी में लिखी थी। इसके प्रकाशन के दस वर्ष बाद मैने इसका हिन्दी अनुवाद करते हुये एक और पुस्तक का प्रकाशन किया। इस पुस्तक में शिलालेखों और स्तंभलेखों के मूल ब्राम्हि स्वरुप, देवनागरी लिप्यांतर और आधुनिक भाषा में भाषांतर (मराठी / हिन्दी) उपलब्ध है।
सम्राट अशोक के शिलालेख और स्तंभ देखने के लिये किये गये मेरे भारत-भ्रमण के दौरान मैने कई छायाचित्र और चलचित्रों का निर्माण किया। इन पर आधारित चित्रमाला बनाई। यह चित्रमाला, मेरे भाषण और अन्य चित्रमाला मैने मेरे YouTube Channel पर रखी है। आप इसे यहाँ से देख सकते है।
मैने सम्राट अशोक के लघु-शिलालेखों के अर्थ को नये स्वरूप में संशोधित किया है। इस से तथागत बुद्ध के महापरिनिर्वाण वर्ष की, समय का विवाद मिटाने वाली, यथा योग्य काल-निश्चिती की गयी।
इस समय निश्चिती पर आधारित भारतीय बौद्ध चांद्र-सौर कालगणन का निर्माण मैने किया है, इसे “बोधि संवछर” यह नाम दिया है।