भारतिय बौद्ध चान्द्र-सौर कालगणन प्रणालि, १९ सौर वर्ष मे २३५ चन्द्रमास होते है , इस वैज्ञानिक तथ्यपर आधारीत है। इस में राशी-नक्षत्रों का कोई संबंध नही है। १९ वर्ष में १९ x १२ = २२८ चन्द्रमास होने चाहिये। परंतु प्रत्यक्ष अवलोकन के पश्चात यह जान पडता है की १९ सौर वर्ष में २३५ चन्द्रमास होते है। अतः इन ७ अधिक चन्द्रमासों को सही सम्मिलित करने के लिये ७ स्तंभोकी एक तालिका बनाते है। इस तालिका के स्तंभो में क्रमशः ३४, ३३, ३४, ३३, ३४, ३३, ३४ खाने बनाते है। हर एक स्तंभ मे एक खाना अधिक चन्द्रमास का होगा। इस अधिक चन्द्रमास को “मैत्रेय” मास कहा जायेगा। स्तंभ संख्या १ से ५ में पाँचवा मास मैत्रेय मास होगा तथा स्तंभ संख्या ६ और ७ में सातवा मास मैत्रेय मास होगा। ऐसा आयोजन करने से वेसाक पुर्णिमा का स्थान हर वर्ष में लगभग स्थिर होगा (मई माह की पुर्णिमा)। इस तालिका को सिद्धार्थ चक्र तालिका कहा जायेगा। यह तालिका निम्न अनुसार होगी।

इसी के संदर्भ से हम एक दूसरी तालिका भी बनाते है। इस तालिका में १९ वर्ष के लिये १९ स्तंभ होंगे और १३ पंक्तियाँ होगी (१९ वर्ष में जो ७ अधिक मास होगे उनके समावेश के लिये १ अधिक पंक्ति)। अब इस तालिका मे सात स्तंभो-वाली तालिका के सभी १९ वर्ष उतारते है। यह तालिका निम्न अनुसार होगी।

बोधि संवछर के लिये त्वरित संदर्भ सूची
- बोधि संवछर का आरंभ रविवार, तेज प्रथमा वैशाख बोधि संवछर ०००१ से होती है, यह दिन जागतिक सामयिक कालगणन अनुसार १८ अप्रैल ५१६ ईसा पूर्व है।
- अमावस्या के अगले दिन चांद्रमास शुरू होगा और अगली अमावस्या को संपूर्ण होगा। (अमांत चंद्र मास)
- हर चांद्रमास के दो भाग होंगे, अमावस्या से पूर्णिमा तक (प्रकाशमान पक्ष) तेज पक्ष और पूर्णिमा से अगली अमावस तक (अंधेरा पक्ष) तम पक्ष होगा। ऐसे १२ महीनों का एक वर्ष होगा।
- वैशाख, आषाढ़, भाद्रपद, कार्तिक, पौष, फाल्गुन और मैत्रेय इन महीनों में ३० दिन होंगे।
- जेष्ठ, श्रावण, अश्विन, अग्रहण (मार्गशीर्ष), माघ, चैत्र इन महीनों में २९ दिन होंगे। इन महीनों में तम अष्टमी नही होगी।
- १९ वर्ष के चक्र को सिद्धार्थ चक्र कहेंगे और इस में २३५ चांद्र-मास होंगे।
- सिद्धार्थ चक्र के सात भाग होंगे और हर एक भाग को मैत्रेय स्तंभ कहेंगे। एक से सात मैत्रेय स्तंभ में बारी-बारी से ३४ और ३३ चांद्र-मास होंगे तथा हर एक मैत्रेय स्तंभ में एक मैत्रेय मास होगा।
- किस संवछर में किस स्थान पर मैत्रेय मास होगा इसका गणन बीते हुए संवछर संख्या से (सिद्धार्थ चक्र १९ वर्ष तालिका अनुसार) निम्न नियमों से होगा।
- @(संवछर संख्या – १) ÷ १९ के पूर्णांक अनुपात के पश्चात …..
- (@ यह संख्या पिछला संवछर दर्शाती है।)
- शेष ० हो तो पाँचवा मास मैत्रेय मास होगा।
- शेष ३ हो तो दूसरा मास मैत्रेय मास होगा।
- शेष ५ हो तो दसवाँ मास मैत्रेय मास होगा।
- शेष ८ हो तो सातवाँ मास मैत्रेय मास होगा।
- शेष ११ हो तो तीसरा मास मैत्रेय मास होगा।
- शेष १४ हो तो दूसरा मास मैत्रेय मास होगा।
- शेष १६ हो तो दसवाँ मास मैत्रेय मास होगा।
- कोई भी अन्य शेष हो तो उस संवछर में मैत्रेय मास नही होगा ।
- जैसे १९ सौर वर्ष में आने वाले २२८ के बजाय २३५ चन्द्रमासों का सटीक मेल करनेके लिये के १९ वर्ष में ७ अधिक मैत्रेय मास का आयोजन होता है, वैसे ही १९ वर्ष के … १९ x ३६५.२४२५ = ६९३९.६०७५ और … २३५ चन्द्रमास के २३५ x २९.५३०५… = ६९३९.६६७५ में होने वाले ०.०६७५… दिनों का सटीक मेल करने के लिये लगभग ५ वर्ष में एक अधिक दिन का आयोजन किया गया है। जिस वर्ष में यह अधिक दिन होता है उसे अशोक संवछर कहा गया है। अशोक संवछर में चैत्र माह में २९ के बजाय ३० दिन होते है।
- चलने वाले संवछर के अंतिम एक अंक ० या ५ हो तो यह संवछर अशोक संवछर होगा।
- चलने वाले संवछर के अंतिम दो अंक ०० हो तो यह संवछर अंतिम अंक ० होते हुए भी अशोक संवछर नही होगा।
- चलने वाले संवछर के अंतिम तीन अंक २००, ४००, ६०० या ८०० हो तो यह संवछर अंतिम दो अंक ०० होते हुए भी अशोक संवछर होगा।
(अर्थात अंतिम ३ अंक १००, ३००, ५००, ७००, ९०० और ००० हो तो यह संवछर अशोक संवछर नही होगा।)
- अशोक संवछर में चैत्र मास में २९ की बजाय ३० दिन होंगे।
- बोधि संवछर आरंभ दिवस से किसी भी दिन तक कूल दिनों के गणन संख्या को बोधि दिनांक कहेंगे।
अशोक संवछर का गणित कुछ इस प्रकार होगा।
प्रति १०० वर्ष १९ अशोक संवछर होंगे और प्रति ५०० वर्ष २ अशोक संवछर इस में जोडे जायेंगे। अर्थात (कूल संवछर ÷ ५) – कूल शतक + (कूल संवछर ÷ ५००) x २ यह संख्या कूल अशोक संवछर के समान होगी। (केवल पूर्णांक)
बोधि दिनांक यह संकल्पना जागतिक सामयिक कालगणन में जूलियन दिन अंक जैसी है। जूलियन दिन अंक १ जनवरी ४७१३ ईसा पूर्व से इच्छित ईसाई दिनांक तक कूल दिनों की गिनती है। बोधि दिनांक १८ अप्रैल ५१६ ईसा पूर्व से इच्छित दिन तक कूल दिनों की गिनती है।
किसी भी बोधि संवछर में किसी भी तिथि की बोधि दिनांक संख्या हमारे लिये बहुत उपयुक्त होती है। किसी भी बोधि संवछर तिथि के सप्ताह दिवस (वार) का पता करने के लिये भी इसका उपयोग होता है।
साप्ताहिक वार पता करने के लिये बोधि दिनांक संख्या को १९ से भाग करते है। पुर्णांक अनुपात के पश्चात जो एक अंक का शेष रहता है, इसे निम्न तालिका के पहली पंक्ति में जाँच लेते है। इसके अनुरुप दूसरी पंक्ति में इस बोधि दिनांक का वार मिलता है।

किसी भी सामान्य संवछर में ३५४ दिन होते है। सामान्य अशोक संवछर में ३५५ दिन होते है। संवछर में मैत्रेय मास हो तो उस संवछर में ३८४ दिन होते है। अशोक संवछर में मैत्रेय मास हो तो उस संवछर में ३८५ दिन होते है।
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।। तं तेजसा भवतु ते जयमंगलानि ।।